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किताबों से दोस्ती जरूरी है, इनके बिना जिंदगी अधूरी है…

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– विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन ने छेड़ी किताबों से जिंदगी संवारने की अनूठी मुहिम

– जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में बाधा नहीं बनेगी किताबों की कमी : एसएस बांगा

एनसीआर संवाद

फरीदाबाद। “किताबों से दोस्ती जरूरी है, इनके बिना जिंदगी अधूरी है…”। किताबों की अहमियत को दर्शाते कुछ इसी तरह के संदेश को साथ लेकर विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन ने किताबों से जिंदगी संवारने की अनूठी मुहिम छेड़ी है। जरूरतमंद बच्चों की पहुंच से दूर महंगी किताबों को उपलब्ध कराने की पहल शुरू करने वाले ट्री-मैन के नाम से मशहूर विक्टोरा इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक एसएस बांगा कहते हैं कि बेहतर जिंदगी का रास्ता बेहतर किताबों से होकर गुजरता है। इस नाते किताबों की अहमियत हमेशा बनी रहेगी। इंटरनेट और ई-बुक्स के जमाने में भी जीवन संवारने की काबिलियत रखने वाली किताबों का महत्व कभी खत्म नहीं हो सकता।

एसएस बांगा कहते हैं कि ऐसे कई जरूरतमंद बच्चे हैं जो महंगी किताबों से वंचित रह जाते हैं। ऐसे बच्चों की पढ़ाई में किताबों की कमी को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। इसी मकसद के साथ विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन ने जरूरतमंद बच्चों को महंगी किताबें उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई है। किताबों के बिना किसी का सपना अधूरा नहीं रह पाए, विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के माध्यम से ऐसे सभी बच्चों की मदद की जाएगी। विक्टोरा इंडस्ट्रीज के निदेशक सतबीर सिंह बांगा के जन्मदिवस के अवसर पर 18 अप्रैल को मेगा बुक डोनेशन ड्राइव “देने का सुख…” की शुरुआत की गई। सेक्टर-55 स्थित राजकीय माध्यमिक मॉडल संस्कृति विद्यालय में 10वीं, 11वीं और 12वीं क्लास के 100 बच्चों को किताबों के सेट वितरित किए गए। विद्यालय के प्रधानाचार्य सतेंद्र सौरोत ने कहा क पाठ्यक्रम के अलावा इंजीनियरिंग व मेडिकल आदि की प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने वाले बच्चों को जिन पुस्तकों की जरूरत होती है वो काफी महंगी होती हैं। इस कारण आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे अधूरी व कमजोर तैयारी के कारण प्रवेश परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने से वंचित रह जाते हैं। विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के प्रयास से जरूरतमंद होनहार बच्चे अपने सपनों को साकार कर पाएंगे।

विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन की अध्यक्ष दमनदीप बांगा कहती हैं कि जीवन की बड़ी-बड़ी उलझनों से बाहर निकलने का रास्ता दिखाने वाली किताबों से दोस्ती करने की जरूरत है। घर पर माता-पिता और स्कूलों में अध्यापक बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे तो बात बनेगी। किताबें मनुष्य की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। इनसे दोस्ती करने वाला कभी भी अकेला नहीं रहता। ये मनुष्य को ज्ञान का अनमोल खजाना देती हैं और बदले में कुछ भी नहीं मांगती। किताबों के इसी महत्व को समझते हुए विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन की तरफ से मुहिम शुरू की गई है।