NCR संवाद : भगवान शिव का स्वरूप ही प्रकृति का प्रतीक है। उनके मस्तक पर चंद्रमा, गले में सर्प, शरीर पर भस्म, जटा से बहती गंगा और उनका वानप्रस्थ जीवन इस बात का संकेत है कि वे सम्पूर्ण सृष्टि से गहराई से जुड़े हैं। शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि प्रकृति की अद्वितीय ऊर्जा के परिचायक हैं। जब हम शिव की पूजा करते हैं तो हम वास्तव में प्रकृति की आराधना करते हैं। इसी भाव के चलते बेलपत्र को शिव को अर्पित करने का विशेष महत्व है। मशहूर उद्योगपति एवं पर्यावरणप्रेमी एसएस बांगा का मानना है कि शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि संपूर्ण प्रकृति के प्रतीक हैं। उनका स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीना चाहिए।
एसएस बांगा कहते हैं कि ऐसा माना जाता है कि शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है और उन्हें अर्पित करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। बेलपत्र केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह एक चमत्कारी औषधीय पौधा भी है। आयुर्वेद में इसे कई बीमारियों के उपचार में उपयोग किया जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व और औषधीय गुण इसे एक संपूर्ण स्वास्थ्यवर्धक पत्ता बनाते हैं।
स्वास्थ्य के लिए वरदान: बेलपत्र के औषधीय गुण: पर्यावरणप्रेमी बांगा बताते हैं कि बेलपत्र में विटामिन A, C, फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। यह शरीर की कई समस्याओं में फायदेमंद साबित होता है:
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है: इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को संक्रमण से बचाते हैं।
- ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित करता है: मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए यह बेहद लाभकारी है।
- पाचन तंत्र को मजबूत करता है: बेलपत्र के सेवन से कब्ज, अपच, दस्त और पेट संबंधी विकार ठीक होते हैं।
- त्वचा के लिए फायदेमंद: इसका लेप लगाने से चेहरे पर निखार आता है और पसीने की दुर्गंध दूर होती है।
- हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है: बेलपत्र का सेवन कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है और दिल को स्वस्थ रखता है।
पर्यावरण संरक्षण में बेलपत्र का योगदान: पर्यावरणप्रेमी बांगा बताते हैं कि बेल का वृक्ष सिर्फ धार्मिक और औषधीय रूप से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी बेहद महत्वपूर्ण है:-
- वायु को शुद्ध करता है: बेल का पेड़ ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाता है और प्रदूषण को कम करता है।
- मिट्टी को उपजाऊ बनाता है: इसकी पत्तियां गिरकर मिट्टी में मिलती हैं, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है।
- ग्लोबल वार्मिंग कम करने में सहायक: बेल वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करता है।
एसएस बांगा कहते हैं कि, आज के समय में जब पर्यावरण असंतुलन और प्रदूषण की समस्याएं बढ़ रही हैं, ऐसे में बेल के वृक्षों का संरक्षण करना बेहद जरूरी है। बेल का पेड़ प्रदूषण को नियंत्रित करने, हवा को शुद्ध करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। शिव की आराधना का अर्थ केवल धार्मिक क्रियाकलापों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति से जुड़ने का भी एक सुंदर तरीका है। बेलपत्र का महत्व हमें यह सिखाता है कि हमारी धार्मिक आस्था केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य और समाज कल्याण से भी जोड़ना चाहिए।
इसलिए, अगली बार जब आप बेलपत्र शिव को अर्पित करें, तो यह भी संकल्प लें कि आप प्रकृति के संरक्षण में भी अपनी भूमिका निभाएंगे। यही सच्ची शिव भक्ति होगी।